राम देव सिंह कलाधर माटी के सच्चे कवि थे।उनकी रचनाएं भोजपुरी साहित्य को समृद्ध करती हैं।शिक्षा के क्षेत्र में आप का योगदान सराहनीय रहा।दुख की बात है कि उनकी मृत्यु के बाद लोक रंजन ,लोक मंगल और देश प्रेम से ओत प्रोत उनकी रचनाओं को यथेष्ठ स्थान मिलना अभी भी शेष है। उनकी देशप्रेम से ओतप्रोत एक रचना देखें…
” ए री ह्योरोज रोज रोज खोजता है मुझे,
घुसने न दूंगी झांसी से नगर में,
घस घस घास के समान तुम्हें काट दूंगी,
पाट दूंगी सारा रणक्षेत्र क्षण भर में,
भले ही कलाधर रणक्षेत्र का खिलाड़ी बने,
भूल कर भी ना आना सामने समर में…।।”
इस उम्मीद के साथ कि इनकी रचनाओं को समाज में उचित स्थान मिले …. शत शत नमन🙏🙏🙏
राम देव सिंह कलाधर माटी के सच्चे कवि थे।उनकी रचनाएं भोजपुरी साहित्य को समृद्ध करती हैं।शिक्षा के क्षेत्र में आप का योगदान सराहनीय रहा।दुख की बात है कि उनकी मृत्यु के बाद लोक रंजन ,लोक मंगल और देश प्रेम से ओत प्रोत उनकी रचनाओं को यथेष्ठ स्थान मिलना अभी भी शेष है। उनकी देशप्रेम से ओतप्रोत एक रचना देखें…
” ए री ह्योरोज रोज रोज खोजता है मुझे,
घुसने न दूंगी झांसी से नगर में,
घस घस घास के समान तुम्हें काट दूंगी,
पाट दूंगी सारा रणक्षेत्र क्षण भर में,
भले ही कलाधर रणक्षेत्र का खिलाड़ी बने,
भूल कर भी ना आना सामने समर में…।।”
इस उम्मीद के साथ कि इनकी रचनाओं को समाज में उचित स्थान मिले …. शत शत नमन🙏🙏🙏