“सहित्यांगन” के तरफ से रउरा सभे के स्वागत बा।
अब देर कवना बात के - एक कदम आगे बढ़ीं। आपन असली पहचान, भोजपुरी भाषा, साहित्य, आ संस्कृति के आनन्द लीं।

अपने के इयाद में

ShardanandPrasadशारदानन्द प्रसाद

(02/01/1929 – 08/10/2003)

बचपन के सवारे में राउर योगदान पा के हमनी के धन्य हो गइनी। पढ़े – लिखे आ भोजपुरी साहित्य के समृद्धि-सौन्दर्य के समझ के बीज बोवे में अपने के योगदान के नतीजा ह कि आज भोजपुरी साहित्य के क्षेत्र में “भोजपुरी साहित्यांगन” हमनी के एक छोटहन प्रयास बा। हमनी के जीवन में राउर छाप हमेशा रही।

हमेशा राउर इयाद बनल रही!

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