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भोजपुरी साहित्यांगन

Author: साहित्यांगन

दण्डिस्वामी विमलानंद सरस्वती

नया जमाना के सोच सगरी गजल के तेवर पलट रहल बा ………….. (तंग इनायतपुरी )

दिखाई देता ओही के भीतर जे नइखे लउकत उ के ह साहेब …….. (तंग इनायतपुरी )