भोजपुरी साहित्यांगन

13 Replies to “दरद”

  1. वाकही रोआई आग‌ईल। बहुत सुनदर रचना।।

  2. आज कल ई सब कविता काहू नइखे पढ़त नइखे सबकेहु रोमांटिक कविता के पढ़ता मगर ई जीवन के यथार्थ बतावता ई केहू के साथ हो सकता। वकाहि बहुत सुन्दर रचनाआज कल ई सब कविता काहू नइखे पढ़त नइखे सबकेहु रोमांटिक कविता के पढ़ता मगर ई जीवन के यथार्थ बतावता ई केहू के साथ हो सकता। वकाहि बहुत सुन्दर रचना

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