सोरठी बृजाभार

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 Sorathi Brijabhar

लेखक : बाबू महादेव प्रसाद सिंह

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One Reply to “सोरठी बृजाभार”

  1. मेरे दादा जी थे । इनको कौन नही जानता । आज भी उनकी बहोत सी निशानी । हमारे घर में सजा कर रखा हवा है ।
    और मुझे गर्भ महसूस होता है । की मैं उनके यह पैदा लिया हु ।
    आज उनके ही देन से ठाकुर प्रसाद इतना फेमस है और मेरे दादा जी आज सुर्खियों में दबे हुवे है ।
    ऐसे बहोत सारे पत्रकार उनके फोटो ले जा के उनके हर निशानी ले जाके लाखो लाख कमा रहे है

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